बिहार देश को नया रास्ता दिखाएगा

बिहार में वोट चोरी के खिलाफ महागठबंधन की यात्रा को जो अभूतपूर्व समर्थन मिला उसके पीछे जमीनी सच्चाई है।

द हिन्दू में प्रकाशित सर्वे के अनुसार चुनाव आयोग के SIR द्वारा हटाए गए 65 लाख नामों के विश्लेषण में विभिन्न पोलिंग बूथों पर भारी विसंगतियां पाई गई हैं। ये 8 प्रकार की हैं। 80 भागों (पोलिंग स्टेशनों) में कम उम्र के लोगों की मौतों की संख्या असामान्य है।127 भागों में कटे नामों में महिलाओं की संख्या असामान्य रूप से ज्यादा है। 1985 भागों में कटे नामों की संख्या असामान्य रूप से अधिक है। 412 भागों में मौतों की संख्या असामान्य रूप से अधिक है,7216 भागों में मृत्यु अनुपात बहुत अधिक है। 973 भागों में शत प्रतिशत मृत्यु आधारित नाम कटे हैं। 5084 भागों में अनुपस्थित वोटर की संख्या असामान्य रूप से अधिक है। 663 भागों में स्थाई रूप से शिफ्ट कर चुकी महिलाओं का पैटर्न संदेहास्पद है।

उदाहरण के लिए भागलपुर के एक बूथ पर 58 मृत लोगों में 50 लोग 50 वर्ष से कम आयु के हैं, ऐसे ही प. चंपारण के एक बूथ पर 70 मृत में से 59, पूर्णिया के एक बूथ पर 61 में 48 लोग, मधुबनी के एक बूथ पर 58 में 45 लोग 50 वर्ष से कम आयु के हैं, पूर्वी चंपारण के एक बूथ पर 59 मृत लोगों में 45 की उम्र 50 वर्ष से कम है। सूची में कटे नामों में भारी लैंगिक पक्षधरता देखी जा सकती है। नाम कटे लोगों में किशनगंज के एक बूथ पर 105 में 97 महिलाएं हैं, रोहतास के एक बूथ पर 85 कटे नामों में 78 महिलाएं हैं, इसी तरह बक्सर के एक बूथ पर कटे  57 कटे नामों में 52 महिलाएं हैं। सारण के एक बूथ पर कटे 64 नामों में 58 महिलाएं हैं।

एक दूसरी विसंगति भारी संख्या में नामों का कटना है। गोपालगंज के एक बूथ पर 641 लोगों का नाम कट गया, जिसमें 599 शिफ्ट हो गए, 39 की मृत्यु हो गई और 3 अनुपस्थित थे। इसी तरह गोपालगंज के ही एक अन्य बूथ पर 627 लोगों का नाम कटा है जिसमें से सब कहीं शिफ्ट हो जाने वाली श्रेणी में हैं। इसी तरह भोजपुर के एक बूथ पर 605 लोगों के नाम कट गए जिसमें 539 कहीं शिफ्ट कर गए और 46 का निधन हो गया। कुछ बूथों पर मृतकों की संख्या इतनी अधिक है कि वह असामान्य है। 

भागलपुर के एक बूथ पर मृतकों की संख्या 165 दिखाई गई है जिनकी औसत आयु 48.5 साल है, यह राष्ट्रीय औसत आयु से भी कम है। इसी तरह पूर्णिया के एक बूथ पर मृतकों की संख्या 181 है जिनकी औसत आयु 54.9 साल है। सारण के एक बूथ पर मृतकों की संख्या 162 है। कुछ बूथों पर कटे नामों में मृतकों की संख्या का अनुपात असामान्य रूप से अधिक है। भागलपुर के एक बूथ पर कुल कटे 166 नामों में 165 मृत हैं। सारण के एक बूथ पर कुल कटे 191 नामों में 162 मृतक हैं। इसी तरह किशनगंज में कुल 171 कटे नामों में 158 मृतक हैं। एक और असामान्य श्रेणी है जहां सारे कटे नाम मृतक श्रेणी में हैं।

भोजपुर के एक बूथ पर 126, गोपालगंज के एक बूथ पर 124, वैशाली के एक बूथ पर 117 कटे नाम सब के सब मृतक श्रेणी में हैं। इसी तरह कुछ बूथों पर अनुपस्थित पाए गए लोगों की संख्या असामान्य रूप से अधिक है। गोपालगंज के एक बूथ पर 457 लोग अनुपस्थित पाए गए इसलिए उनका नाम कट गया। पूर्णिया के एक बूथ पर 351 लोगों का नाम अनुपस्थित पाए जाने के कारण कट गया। इसी तरह वैशाली के एक बूथ पर 339 लोग अनुपस्थित पाए गए इसलिए उनका नाम कट गया। कई बूथों पर महिलाओं के शिफ्ट होने की भारी संख्या संदेहास्पद है। उदाहरण के लिए गोपालगंज के ही 3 अलग-अलग बूथों पर यह संख्या क्रमशः 80, 63 और 71 पाई गई।

इस सर्वे में जोड़े गए असामान्य आंकड़े तो अभी दिए ही नहीं गए हैं। उदाहरण के लिए इस सर्वे में वे आंकड़े तो अभी हैं ही नहीं जहां एक-एक पते पर सैकड़ों लोगों के नाम दर्ज हैं। अथवा बड़ी संख्या में लोगों के पते के नाम पर शून्य लिखा हुआ है अथवा एक ही आदमी कई बूथों पर मतदाता है न सिर्फ एक राज्य में बल्कि अनेक राज्यों में, जैसा राहुल गांधी ने बंगलौर सेंट्रल के महादेवपुर विधान सभा में विस्तृत आंकड़ों और उनके विश्लेषण के आधार पर दिखाया है जहां एक विधानसभा में एक लाख से ऊपर फर्जी वोटर जोड़ दिए गए जो भाजपा को मिले और इस Lead के आधार पर शेष 6 विधानसभाओं में हारने के बावजूद भाजपा वह संसदीय सीट जीतने में कामयाब रही।

बहरहाल राहुल गांधी ने यात्रा के समापन भाषण में ऐलान किया कि अभी तो उन्होंने एटम बम फोड़ा है, अब वे जल्द ही हाइड्रोजन बम फोड़ेंगे, उनके ऐसा कहने पर जब सामने भीड़ से किसी ने कहा वाराणसी तो बिना कुछ बोले राहुल ने जिस तरह की मुख मुद्रा बनाई उससे यह शंका बलवती हुई कि संभवतः वाराणसी को लेकर वे कोई बड़ा खुलासा करने वाले हैं। वैसे हरियाणा, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश का भी वे लगातार नाम लेते रहे जहां वोट घोटाले के माध्यम से चुनाव परिणाम बदले गए हैं।

जो भी हो केंद्रीय चुनाव आयोग की प्रतिष्ठा मिट्टी में मिल चुकी है। यह तथ्य तमाम सर्वेक्षणों से भी सामने आ चुका है।

अप्रत्याशित परिणामों को देखकर लोग पहले इसे EVM का ही खेल समझते थे। लेकिन अब यह तथ्य सामने आ चुका है कि हजार और तरीकों से चुनाव को प्रभावित किया जा रहा है और चुनाव नतीजों को पलट दिया जा रहा है। कहीं असामान्य ढंग से नए नाम जोड़कर, कहीं काटकर और कहीं शायद दोनों के माध्यम से।

बहरहाल यह स्थिति अधिक दिनों तक चलने वाली नहीं है। बिहार की वोटर अधिकार यात्रा ने न सिर्फ बिहार की जनता को जागृत किया है बल्कि इसका संदेश पूरे देश में गया है कि जनता के वोटों की चोरी द्वारा उनके जनादेश को पलट दिया जा रहा है। यह तो एक दम लोक तंत्र की जड़ पर ही प्रहार है, जहां हर व्यक्ति के एक वोट की संवैधानिक व्यवस्था की गई है। अगर वोट देने का अधिकार ही छीन लिया जाएगा, जनादेश को फर्जी वोटों के माध्यम से बदल दिया जाएगा, तो फिर संविधान और लोकतंत्र का क्या अर्थ बचेगा? यात्रा की अभूतपूर्व सफलता से भाजपा पूरी तरह से बैक फुट पर चली गई।

हैरान भाजपा गाली को मुद्दा बनाकर पहल लेने की कोशिश कर रही है। उसने इसे एक भावनात्मक मुद्दा बनाकर ‘बिहार बंद’ का नारा दिया है। लेकिन यह तरकीब कामयाब होने वाली नहीं है। जनता अब समझ चुकी है कि जो दांव पर लगा है वह लोकतंत्र और संविधान है। अगर यह खत्म हो गया तो उसके रोजी-रोटी के सारे अधिकार खत्म हो जाएंगे, इनके लिए लड़ाई बेमानी हो जाएगी। उम्मीद है कि एकताबद्ध विपक्ष और नागरिक समाज इस पूरे मामले को जमीन तक ले जाएगा और भाजपा गठबंधन को करारी शिकस्त देगा तथा पूरे देश को हमेशा की तरह नया रास्ता दिखाएगा।

(लाल बहादुर सिंह इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष हैं।)

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